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कल आसान लगेगी ईएमआई

आप कभी-कभी सोच कर हैरान हो सकते हैं कि पांच साल पहले जब आपने घर की एईएमआई (मासिक किस्त) देना शुरू किया था तो वह आपको कठिन लगती होगी, लेकिन आज वह आसान लगती है. अगले पांच साल में आपके लिए वह ईएमआई और भी आसान लगेगी. इसके पीछे महंगाई दर की भी भूमिका है. लंबी अवधि में महंगाई के दबाव से रुपये की कीमत लगातार घटती है. हो सकता है पांच साल पहले 30,000 रुपये की ईएमआई आपके वेतन का 50 फीसदी हो, लेकिन 8 फीसदी सालाना की महंगाई दर के दबाव में उसके अनुपात में आपका वेतन भी बढ़ता है. ऐसे में हो सकता है कि पांच साल बाद आज वह ईएमआई आपके वेतन का एक तिहाई ही हो. आपके घर की बाजार कीमत भी इस दौरान इतनी बढ़ चुकी होगी कि आप अपना कर्ज चुकाने में आराम महसूस करेंगे. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप कर्ज लेकर शॉपिंग करें या आईपीओ में पैसा लगाएं. लोन का घर या अन्य प्रॉपर्टी खरीदने में लंबी अवधि के लक्ष्यों के लिए किया गया उपयोग आपको आने वाले समय में महंगाई से लडऩे में मदद करता है.

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