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मकान किराएं पर दें तो...

रिटायर होने के बाद अमेरिका में रह रहे बेटे के पास जाने से पहले मल्होत्रा साहब ने सोचा कि क्यों न दिल्ली का अपना फ्लैट किराए पर दे दिया जाए. सोचा कि उसकी देखभाल भी हो जाएगी और कुछ पैसे भी जुड़ते रहेंगे. आने से एकाध महीने पहले बता देंगे और मकान खाली हो जाएगा. उनके दूर के किसी रिश्तेदार ने उन्हें अपने किसी परिचित के बारे में बताया और मल्होत्रा साहब ने सोचा कि क्योंकि रिश्तेदार का परिचित ही है तो ज्यादा पूछताछ क्या करनी. किराया आप ही ले लिया करना, यह कहकर चाबी अपने रिश्तेदार को पकड़ा दी और बेटे के पास चले गए.

एक साल बाद उन्हें वतन की याद आई तो मल्होत्रा साहब ने सोचा कि छह सात महीने भारत में रहकर आया जाए. रिश्तेदार को फोन किया तो पता चला कि फोन नंबर स्विच आफ. काफी कोशिश की लेकिन नहीं मिला. खैर. भारत आए और अपने फ्लैट में पहुंचे तो पता चला कि वह परिचित तो फर्जी दस्तावेज बनाकर औऱ फ्लैट बेचकर गायब हो गया है. अब आगे थी मुकदमेबाजी और बेमतलब की टेंशन.

इसलिए प्रॉपर्टी भले ही रेजिडेंशियल हो या कॉमर्शियल किराए पर देने से पहले कुछ सावधानियां बरतें ताकि कोई परेशानी न हो. रेंट एग्रीमेंट में दोनों पक्षों की शर्तों को पूरी तरह शामिल किया जाए। इसमें किराया भुगतान का तरीका, सुविधाओं का ब्योरा और रिन्युअल की दशा जरूर शामिल हो. प्रॉपर्टी को किराए पर देने या लेने से पहले लीज या रेंट एग्रीमेंट जरूर किया जाए. यही नहीं इसमें दोनों पक्षों की शर्तों को शामिल किया जाना चाहिए. भविष्य में किसी भी विवाद से बचने के लिए एग्रीमेंट में सभी शर्तों का साफ-साफ खुलासा करना ठीक रहता है. कोई भी एग्रीमेंट कानूनी सलाहकारों की देखरेख में ही तैयार कराना चाहिए.

प्रॉपर्टी को किराए पर देने या लेने से पहले उसके मालिक के बारे में स्पष्ट ब्योरा होना चाहिए. मसलन वो प्रॉपर्टी किसके नाम है और वो क्यों किराए पर देना चाहता है. अगर प्रॉपर्टी का मालिक उसको किराए पर न दे रहा हो और ये काम कोई पावर ऑफ अटॉर्नी धारक कर रहा हो, तो उसकी भी वैधता स्पष्ट होनी चाहिए. जो भी किराए पर दे रहा हो, उसको इसके बारे में कानूनी हक होना चाहिए. किराए पर देने के लिए ऐसा होना जरूरी है. कई बार लोग फर्जी कागजात के सहारे प्रॉपर्टी को किराए पर उठा देते हैं. बाद में लोगों को बेकार में कानूनी पचड़े झेलने पड़ते हैं.

रेंट एग्रीमेंट की शर्तों पर दोनों पक्षों में पहले ही बात हो जानी चाहिए. अगर आप मालिक हैं और प्रॉपर्टी किराए पर देना चाहते हैं, तो फिर रेंट एग्रीमेंट पर आपको और किराएदार को दस्तखत करने होंगे. दोनों पक्षों की शर्तों पर सहमति होने पर ही एग्रीमेंट पर साइन किए जाने चाहिए. रेंट एग्रीमेंट में प्रापर्टी का पूरा डिटेल दिया जाना चाहिए. मसलन उसकी लोकेशन आदि का स्पष्ट ब्योरा. इसके अलावा दोनों पक्षों के पते आदि का साफ-साफ जिक्र होना चाहिए. एग्रीमेंट कब से कब तक के लिए है इस बारे में भी पहले से ही तय कर लिया जाना चाहिए. साथ ही सिक्योरिटी डिपॉजिट, इस पर ब्याज मिलेगा या नहीं और इसकी वापसी की क्या स्थिति रहेगी, इसका विवरण भी दिया जाए. किराए के भुगतान का तरीके, एडवांस और मासिक किराए का साफ-साफ जिक्र करना बेहतर रहता है. एडवांस किराए को किस तरह एडजस्ट किया जाएगा. ऐसा होगा या नहीं इसका विवरण भी दिया जाना चाहिए. किराया कितने समय बाद बढ़ाया जाएगा और ये कितने फीसदी बढ़ेगा, इससे संबंधित शर्तों को भी एग्रीमेंट में जोड़ा जाना चाहिए.

किराए पर दी जा रही प्रॉपर्टी में कौन-कौन सी सुविधाएं होंगी, इसका ब्योरा भी दिया जाना चाहिए. किराएदार को कौन-कौन सी सुविधाएं होंगी. कामन एरिया आदि का इस्तेमाल कैसे किया जाएगा. साथ ही म्यूनिसिपल कार्पोरेशन और हाउसिंग सोसाइटी आदि के चार्जेज का भुगतान कौन करेगा, इसका उल्लेख करना ठीक रहता है. बिजली, जनरेटर, लिफ्ट और एसी आदि की सुविधाएं हों, तो इसका भी जिक्र किया जाए. प्रॉपर्टी की रिपेयेरिंग आदि का क्या तरीका होगा. कौन सी मरम्मत किराएदार कराएगा और किस टूट-फूट के लिए मकान मालिक जिम्मेदार होगा, इस बारे में ठीक से उल्लेख किया जाना चाहिए.

एग्रीमेंट रद्द होने की दशा का जिक्र भी किया जाना चाहिए. यानी दोनों पक्षों को कौन-कौन सी शर्तें माननी होंगी, इसका ब्योरा एग्रीमेंट में दिया जाना चाहिए. इसके साथ ही नोटिस पीरियड को भी इसमें शामिल किया जा सकता है. मसलन किराएदार खाली करने से कितने दिन पहले सूचित करेगा और प्रॉपर्टी मालिक प्रॉपर्टी खाली कराने से कितने दिन पहले नोटिस देगा, इसका जिक्र बेहद जरूरी होता है.

किन-किन शर्तों के पालन पर एग्रीमेंट का रिन्युअल हो सकेगा. साथ ही इसकी शर्तें क्या होंगी, इसका भी जिक्र किया जा सकता है. अगर प्रॉपर्टी एक साल से ज्यादा के लिए किराए पर दी जा रही है, तो इसके एग्रीमेंट को रजिस्टर्ड भी कराना चाहिए. इसके लिए जरूरी स्टांप ड्यूटी भी चुकाई जानी चाहिए.

अगर आप रेजीडेंशियल प्रॉपर्टी किराए पर दे रहे हैं, तो ध्यान रखें कि किराए पर देने के बाद उस प्रॉपर्टी पर किराएदार का हक हो जाता है. अगर किराएदार समय पर किराए का भुगतान कर रहा है और एग्रीमेंट की शर्तों का पालन कर रहा है, तो उससे प्रॉपर्टी को खाली नहीं कराया जा सकता. हालांकि इस बारे में भी कई शर्तें हैं. फिर भी ये तथ्य मकान मालिकों को ध्यान में रखना चाहिए कि प्रॉपर्टी को किराए पर देने का मतलब होता है किराएदार को सब कुछ सौंपना. जो लोग इन बातों का खयाल नहीं रखते हैं, उनको बाद में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. यही नहीं ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें लोग किराएदारों से सालों से प्रॉपर्टी खाली नहीं करा पाए हैं. बेहतर यही है कि एग्रीमेंट में सारी शर्तों का ठीक-ठीक पालन किया जाए. नहीं तो मल्होत्रा साहब की तरफ पछताना पड़ सकता है.

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