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प्रॉपर्टी खरीद ने के बाद की जानकारियाँ

अपने देश में एक कहावत काफी प्रचलित है कि शादी और घर भगवान ही तय करते हैं। वास्तविकता भी यही है कि फइनैंसिंग के अलावा इन दोनों मामलों में किस्मत भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। किस्मत वाले हिस्से को ज्योतिषियों पर छोड़ते हुए हम फाइनैंसिंग के मसले पर बात करते हैं। घरेलू प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री करते समय कई बातों पर ध्यान देने की जरूरत होती है। आम तौर पर हम पुरानी जायदाद बेचते हैं और नई प्रॉपर्टी खरीदते हैं। लेकिन इस प्रक्रिया में कई तरह के खर्च छुपे होते हैं।


कर : प्रॉपर्टी बेचने से प्राप्त राशि पर लगने वाले कर की जानकारी आपको होनी चाहिए। प्रॉपर्टी बेचने पर कैपिटल गेन टैक्स का भुगतान करना होता है। अगर प्रॉपर्टी खरीदने के 3 साल के भीतर बेची जाती है तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स का भुगतान करना होता है। प्रॉपर्टी बेचने से प्राप्त होने वाली राशि उस साल की आपकी सकल आय में जुड़ जाती है।

अगर आप 3 साल बाद प्रॉपर्टी बेचते हैं तो प्राप्त राशि पर इंडेक्सेशन लाभ के साथ 20 प्रतिशत के हिसाब से और बिना इंडेक्सेशन के 10 प्रतिशत के हिसाब से कर लगाया जाता है। प्रॉपर्टी बेचने से प्राप्त राशि का निवेश आप विशेष रूप से जारी किए जाने वाले कैपिटल गेन बांड्स में कर सकते हैं लेकिन इसमें वार्षिक अधिकतम 50 लाख रुपये तक का निवेश किया जा सकता है और इसकी लॉक-इन अवधि 3 साल की होती है।

इसके अतिरिक्त  पिछला घर बेचने के 2 साल के भीतर दूसरा घर खरीद कर या तीन साल के भीतर दूसरा घर बनवा कर लांग टर्म कैपिटल गेन की बचत कर सकते हैं। जमीन में निवेश कर लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स बचाने की धारणा गलत है। इस बारे में आप टैक्स प्लानर से संपर्क कर सकते हैं। मूल बात यह है कि जब आप पुरानी प्रॉपर्टी बेच कर नई प्रॉपर्टी खरीदने जाते हैं तो आपको इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि कर किस प्रकार लगाया जाता है।


खरीद-बिक्री का खर्च : जब कभी आप पुरानी प्रॉपर्टी बेचते हैं या नई प्रॉपर्टी खरीदने जाते हैं तो उस पर स्टांप ड्यूटी, रियल्टी की कीमत आंकने वाने की फीस, एप्रेजल फीस, कंस्ट्रक्शन की गुणवत्ता जांचने वाले और वकील की फीस आदि देनी होती है। कुल मिलाकर देखा जाए तो ये शुल्क कम नहीं होते। कभी-कभार खरीदने या बेचने वाला पक्ष आपसे लेन-देन के सभी शुल्क चुकाने को कहता है।


प्राधिकरण के खर्च : प्राधिकरण के कई प्रकार के खर्चे होते हैं जिसे फाइनैंस कराने की जरूरत होती है। इनमें रेगुलैराइजेशन शुल्क, भूमि के इस्तेमाल का कनवर्जन शुल्क, ट्रांसफर शुल्क, डेवलपमेंट शुल्क, मैप शुल्क या दस्तावेजों के वेरिफिकेशन शुल्क आदि शामिल होते हैं।


बिचौलिए का कमीशन : घरेलू प्रॉपर्टी के लिए मौजूदा कमीशन लेन-देन की कीमत का 1-2' चल रहा है। बातचीत के जरिए इसे कम कराया जा सकता है। इसमें तब और आसानी होती है जब आप एक ही ब्रोकर के जरिए प्रॉपर्टी खरीद और बेच रहे हों। बाजार के नियम एवं शर्तों के अनुसार चलने पर आप घाटे में रह सकते हैं। यह बढिय़ा रहेगा कि आप लेन-देन से पहले ही बिचौलिए का कमीशन तय कर लें।


पुरानी प्रॉपर्टी से जुड़े शुल्क : आपने देखा होगा कि सब्जियों को ताजा बनाए रखने के लिए 5-10 मिनट के अंतराल पर पानी का छिड़काव करता रहता है। बिक्री वाली प्रॉपर्टी का उचित रख-रखाव जरूरी है। अगर आप घरेलू प्रॉपर्टी बेचने जा रहे हैं तो इसकी मरम्मत और पेंटिंग कराने की जरूरत पड़ सकती है। इससे आपको बेहतर कीमत मिल सकती है।


पूर्वभुगतान शुल्क : अगर पुरानी प्रापर्टी आपने कर्ज लेकर खरीदी हुई है तो प्रापर्टी ट्रांसफर करने से पहले उसका भुगतान करना जरूरी हो जाता है। लोन का पूर्वभुगतान शुल्क कर्ज की बकाया मूल राशि का 1 प्रतिशत से 4 प्रतिशत तक होता है।


होम इंश्योरेंस : यह महत्वपूर्ण होता है। नया घर खरीदने के साथ ही आपको हो इंश्योरेंस लेने की जरूरत होती है। इसकी लागत मकान के क्षेत्रफल, स्थान, घर के सामान और प्रॉपर्टी की कीमत पर निर्भर करती है।


मॉर्टगेज कवर : अगर नई प्रॉपर्टी लोन लेकर खरीद रहे हैं तो आपको अतिरिक्त जीवन बीमा कवर लेना चाहिए। अधिकतर मामलों में कर्जदाता चाहता है कि आप लोन के साथ ही एक बीमा पॉलिसी ले लें और प्रीमियम की राशि कर्ज की राशि में जोड़ दी जाती है। हालांकि, आपको इसकी जगह टर्म इंश्योरेंस कवर को तरजीह देनी चाहिए। टर्म इंश्योरेंस में कवर की राशि पुनर्भुगतान अवधि के दौरान यथावत बनी रहती है जबकि मॉर्टगेज इंश्योरेंस के मामले में मासिक किस्तों के भुगतान के साथ ही यह घटता जाता है।




नया लोन : नया लोन आप मौजूदा ब्याज दरों के आधार पर लेंगे। हो सकता है कि आपका पुराना लोन कम ब्याज दर पर लिया गया हो और अब ब्याज के खर्चे बढ़ गए हों।

इसके अतिरिक्त, लोन उपलब्ध कराने वाली सभी कंपनियां प्रोसेसिंग और डॉक्यूमेंटेशन के लिए एक तय शुल्क लेती हैं। कुछ कंपनियां आपसे मासिक किस्तों के अग्रिम भुगतान के लिए भी कहती हैं। इन खर्चों के लिए किसी व्यक्ति को तैयार रहना चाहिए।
पार्किंग व अन्य खर्च : अगर खरीदी जाने वाली नई प्रॉपर्टी अपार्टमेंट या फ्लैट है तो आपको पार्किंग शुल्क के तौर पर सालाना या एकमुश्त राशि का भुगतान करना होता है।

 यह शुल्क बिल्डिंग मेंटिनेंस निर्धारित करता है और यह पार्किंग की श्रेणी पर निर्भर करता है। सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद नए घर में रहने की तैयारी करनी होती है जिसमें फर्नीचर, पर्दे, इलेक्ट्रॉनिक सामान आदि शामिल होते हैं। इस प्रकार के छोटे-छोटे खर्च जुड़ कर बड़ी राशि बन जाती है और हमारे घरेलू बचट पर भारी पड़ सकते हैं। इनकी व्यवस्था कर चलने में ही बुद्धिमानी है।

 

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